आजकलवर्तमान" भारत की की अर्थव्यवस्थास्थिति" को लेकर" एक विशेष" प्रचारप्रसार" देखने को मिल रहा है"। सरकारप्रशासन" लगातार" आर्थिक आर्थिक और " विकास" की बातें कर रही हैकर रही है"। लेकिन परन्तु" जमीनी " हकीकतहकीकत कुछ और ही " कहती है"। बेरोज़गारी" आज भी भी" एक बड़ा" चुनौती" बनी हुई हैहै। क्या यह " केवल
क्या प्रचार ही सब कुछ है? भारत की अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी की हकीकत
आजकल, यह राष्ट्र की सम्पत्ति को लेकर अत्यधिक विज्ञापन हो रही है, लेकिन वास्तविकता कुछ अलग है। आंकड़े बताते हैं कि बेरोजगार होना की दर ऊपर जा रही है है, खासकर जवानों के बीच। इशारा यह उठता है कि क्या ये सब केवल एक प्रचार तंत्र का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य सरकार को उत्कृष्ट दिखाने का है? आवश्यकता है कि आ
क्या प्रचार ही सब कुछ है? बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जनता की हकीकत
आजकल | अब | वर्तमान में ज़माने | युग में, प्रचार | विपणन | बनावट ही राजनीति | सरकार | व्यवस्था का मुख्य | अहम | महत्वपूर्ण हिस्सा बन | गया | लगता है। लेकिन | पर | फिर भी क्या सिर्फ | केवल | बस प्रचार | विपणन | बनावट ही सब | हर | पूरा कुछ है? वास्तविकता | असलियत | सच्चाई यह है कि बेरोजगारी | बेरोजगार